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Tana Bana - ताना बाना - Hindi Poems

Hindi Poem
बुनने लगा फिर वो ताना - बाना,
यादों को अपने फिर से सजाना,
कहता है पागल सारा ज़माना,
अपनी ही धुन में वो है दिवाना |

फिक्रों के ऊपर ज़िक्र है जिसका,
उसको ही अपने दिल में बिठाना,
वो ही एक सच्चा - सादा तराना,
फिर भी हर एक से है अनजाना |

हर कोई उसकी बातें बनाए,
हक़ जमाए अपना बताए,
अपने ही हाथो परचम लहराना,
उसके इरादों को किसने है जाना |

सीधा चले वो उल्टा ज़माना,
अपनी ही धुन में बुने ताना - बाना |

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